टीआईएसएस मामला : छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की 

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस कैम्पस में पिछले सप्ताह दिवंगत प्रोफेसर जीएन साईबाबा की पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए कुछ छात्रों द्वारा कार्यक्रम का आयोजन करने को लेकर संस्थान के प्रशासन के रवैये और पुलिस के दस छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने, जांच के नाम पर छात्रों को परेशान करने, उनके लैपटॉप, मोबाइल जब्त करने जैसी पुलिस कार्रवाई की विभिन्न छात्र संगठनों ने कड़ी निंदा की है और एफआईआर वापस लेने की मांग की है। 

प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम ने जारी एक बयान में कहा कि प्रशासन की कार्रवाई छात्र गतिविधियों का अपराधीकरण कर रही है। उन्होंने प्रशासन से शिकायत तुरंत वापस लेने की मांग भी की। फोरम के बयान के अनुसार “सोचने, बोलने, याद करने और असहमत होने के अधिकार प्रशासनिक अनुमति या पुलिस की मंजूरी के मोहताज नहीं हो सकते।

यह स्पष्ट करते हुए कि फोरम ने कार्यक्रम में शिरकत नहीं की थी, फोरम के बयान में कहा गया है कि प्रकरण में कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है लेकिन पुलिस जांच छात्रों के निजी स्पेस का अतिक्रमण है और लैपटॉप, मोबाइल जब्त करना उनके निजता व गरिमा के अधिकार का हनन है। 

संवाद से मामला हल करने के बजाय पुलिस को बुलाने को लेकर फोरम ने प्रशासन की आलोचना की और कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सेन्सरशिप और छात्रों को डराने-धमकाने की इस तरह की घटनाओं से संस्थान की छवि बिगड़ी है और जो कभी प्रसिद्ध समाजशास्त्री गढ़ता था, अब उस पर छात्रों को चुप कराने के आरोप लग रहे हैं। 

इससे पूर्व दिशा विद्यार्थी संघटना ने छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की निंदा करते हुए कहा कि छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा के जीवन और संघर्षों पर चर्चा करने के लिए जुटे थे, जिन्हें गलत तरीके से यूएपीए के तहत वर्षों जेल में रखा गया। 90 फीसदी विकलांग होते हुए भी जेल में उन्हें समुचित चिकित्सकीय उपचार मुहैया नहीं कराया गया। बाद में उन्हें बरी किया गया था। 

दिशा के बयान में एफआईआर को कैम्पस लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है और तुरंत एफआईआर वापस लेने और भविष्य में सुनिश्चित करने की मांग की कि किसी छात्र को इस तरह परेशान, प्रताड़ित नहीं किया जाएगा और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।     

एआईएसएफ, मुंबई ने हमले के खिलाफ छात्रों से एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिरोध अपराध नहीं लोकतान्त्रिक अधिकार है। 

उल्लेखनीय है कि 12 अक्टूबर (पिछले रविवार) को साईबाबा की प्रथम पुण्य तिथि पर 10 से 15 छात्र साईबाबा की तस्वीर के साथ जमा हुए। दक्षिणपंथी छात्र संगठनों के सोशल मीडिया में तस्वीरें प्रसारित करने, और इन पोस्ट पर मुख्यमंत्री व मुंबई पुलिस को टैग किए जाने पर प्रशासन ने शिकायत की और पुलिस ने अगले दिन कैम्पस को छावनी जैसा बना दिया। छात्रों को हिरासत में लिए जाने की भी खबरें आईं। हालांकि पुलिस ने कहा कि किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है लेकिन छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 

पुलिस ने यह भी कहा कि उन्हें संस्थान के प्रशासन से शिकायत मिली थी और यह भी आरोप है कि छात्रों ने दिल्ली दंगों के मामले में कैद शरजील इमाम और उमर खालिद के समर्थन में नारे लगाए। हालांकि छात्रों ने इससे इनकार किया। छात्रों के अनुसार कोई नारेबाजी नहीं हुई थी और प्रोफेसर की तस्वीर के साथ जमावड़ा केवल दस मिनट चला था। 

बीबीसी मराठी न्यूज से बातचीत में साईबाबा की पत्नी वासन्ता ने सवाल किया कि क्या ऐसे व्यक्ति की याद में श्रद्धांजलि कार्यक्रम की अनुमति नहीं दे सकते जिसे अदालत ने बरी कर दिया?”

उन्होंने कहा कि इन छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की निंदा की जानी चाहिए और सभी को छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए।

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